वैकुंठ एकादशी व्रत और इसके लाभ।

वैकुंठ एकादशी व्रत करने का लाभ,
दिसंबर का महीना अपने अंतिम पड़ाव पर है। इस महीने में उत्पन्न एकादशी मार्ग सर से अमावस्या विवाह पंचमी जैसे बड़े व्रत और पर्व मनाए गए और मनाए जाएंगे। हिंदू पंचांग के अनुसार दिसंबर में मार्गशीर्ष का महीना होता है। जो भगवान विष्णु को समर्पित है। 23 दिसंबर को मनाए जाने वाली वैकुंठ एकादशी का बहुत ही महत्व के साथ मनाया जाता है। तिरुपति बालाजी मंदिर श्री रंगम रंगनास्वामी मंदिर, भद्रचलम सीता रामचंद्र मंदिर, इन मंदिरों के अलावा दक्षिण भारत में भगवान विष्णु और उनके अवतारों को समर्पित थे सभी मंदिर वैकुंठ एकादशी मानते हैं।77
    वैकुंठ एकादशी के वैज्ञानिक कारण।
    विज्ञान के मुताबिक के एकादशी के दिन चंद्रमा की कला व्यक्ति की मानसिक आवृत्ति को प्रभावित करती है। एकादशी का व्रत उच्च मासिक के ऊर्जा को उचित दिशा में केंद्रित करने में सहायक करता है और व्यक्ति को अवैध व्यवहार से दूर रखने में मदद करता है। यह तपस्या का एक कार्य है। इसके उद्देश्य हमारी इंद्रियों पर काबू पाना और हमारी चेतना को ऊपर उठना है। 1 वर्ष के भीतर आने वाली 2481 में से प्रत्येक का आदित्य अर्थ होता है। भगवान विष्णु के विभिन्न अवतारों से जुड़ा होता है।
    वैकुंठ एकादशी व्रत के शुभ पूजा का समय।
    वैकुंठ एकादशी व्रत का शुभ और पूजा का समय सुबह 7:27 से 9:20 तक रहेगा। वैकुंठ एकादशी एक विशेष दिन है।
    वैकुंठ एकादशी व्रत के कथा।
    हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार यह सागर मंथन या समुद्र मंथन का दिन है। जब क्षीरसागर का मंथन हो रहा था तब एक के दिव्या अमृत्य प्रकट हुआ और देवताओं के बीच वितरित किया गया। वैकुंठ एकादशी इतनी शक्तिशाली मानी जाती है कि यह शरीर मन और आत्मा को शुद्ध कर देती है। भक्त भी सोचते हैं कि वैकुंठ एकादशी पर उपवास करने से व्यक्ति के जीवन में शांति आती है।
    वैकुंठ एकादशी व्रत और इसके लाभ।
    वैकुंठ एकादशी उपवास प्रार्थना मंत्र और ध्यान, जप और ध्यान के साथ मनाई जाती है। वैकुंठ एकादशी के संबंध में तपस्या दशमी से शुरू होती है। इसके बाद वैकुंठ एकादशी पर कठोर उपवास या कम से काम उन लोगों के लिए आंशिक उपवास किया जाता है जो विभिन्न कर्म से पूर्ण उपवास नहीं कर सकते हैं। इसके बाद द्वादशी या शुक्ल पक्ष के 12वें दिन व्रत खोला जाता है। कठोर उपवास के दौरान पानी और दूध का सेवन या आंशिक उपवास के दौरान उनके साथ फल लेने की अनुमति है। व्रत रखने से इंद्रियों पर नियंत्रण और शरीर शुद्ध होता है। इस प्रकार समिति शरीर में मन शुद्ध हो जाएगा ऐसा अनुभव होता है। एक शुद्ध शरीर और मां व्यक्ति को परमात्मा या परमात्मा के साथ निकटता प्राप्त करने में मदद करता है।
    सभी 108 दिव्या देसम वैकुंठ एकादशी मानते हैं।भगवान विष्णु हीरे चरित्र कवच से सुशोभित है और मंदिर का उत्तरी द्वारा बैकुंठ का प्रवेश द्वार माना जाता है। वैकुंठ एकादशी के दिन खुला रखा जाता है।
    वैकुंठ एकादशी कब मनाई जाएगी।
    वैकुंठ एकादशी 23 दिसंबर 2023 को मनाई जाएगी।

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