अटल बिहारी वाजपेई की जीवन परिचय/Atal Bihari Vajpayee biography in Hindi.

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई का कल्याणी 25 दिसंबर को जन्मदिवस है। अटल बिहारी वाजपेई का जन्म 25 दिसंबर 1924 को हुआ था। हुए एक कवि हृदय राजनेता थे जिन्होंने अपना पूरा जीवन अपनी मशहूर कविता की पंक्तियां हार नहीं मानूंगा, रार नहीं थाहनूंगा की तरह बरता, इसी कविता की तरह हर से कभी हताश नहीं हुए और जीत कभी सिर चढ़कर नहीं बोली। अटल बिहारी वाजपेई के जन्मदिवस पर उनके बारे में कुछ विशेष जानकारी देने वाला हूं।

अटल बिहारी जीवन परिचय।
अटल बिहारी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को हुआ था। हुए एक कवि हृदय राजनेता थे। अटल जी 33 साल की उम्र में पहली बार संसद में पहुंचे थे 1957 बलरामपुर से। 47 वर्षों तक के अटल बिहारी वाजपेई संसद रहे।
अटल जी मंत्र मुक्त कर देने वाला वक्त कैसे बने।
अटल बिहारी वाजपेई अपनी व्यक्तित्व शैली से सुनने वाले को मंत्र मुक्त कर देते थे। उन्होंने यह शैली कैसे विकसित की उन्हीं के शब्दों में, जब उन्होंने पहली बार भाषण देने के लिए खड़ा हुआ तब बड़नगर में था वार्षिक उत्सव का अवसर था। मैं बिना तैयारी किया स्टेज पर खड़ा हो गया। बीच में लड़खड़ा गया इसलिए भाषण बंद करना पड़ा। इसके बाद एक बार ग्वालियर में वाद विवाद में प्रतियोगिता में मेरी बड़ी हंसी हुई। मैं रात कर गया था और बीच में भूल गया तब लोगों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। रात कर आया है रात कर आया है। तब मैं संकल्प लिया कि मैं रेतकर नहीं बोलूंगा। इसके बाद अटल जी जब भी किसी मंच से बोले तो उन्होंने अपने भाषण को कभी रता नहीं बल्कि संबंधित विषय का गहन अध्ययन और चिंतन मनन किया। इस तरह से हुए सफल वक्ता सिद्ध हुए।
तीन हस्तियों ने की पीएम बनने की भविष्यवाणी।
कई हस्तियों ने पहले ही उनके प्रधानमंत्री बनने की भविष्यवाणी कर दी थी। पंडित नेहरू ने एक बार किसी विदेशी मेहमान से बाजपेई का परिचय कराते हुए कहा था कि यह नौजवान एक दिन देश का प्रधानमंत्री बनेगा। इसी तरह लालकृष्ण आडवाणी ने 1992 में अटल जी के साथ अपनी शुरुआती मुलाकातों का जिक्र करते हुए अपनी आत्मकथा मेरा देश मेरा जीवन में लिखा, मैं अनुभव किया कि वह नियति पुरुष एवं ऐसे नेता हैं जिसे एक दिन भारत का नेतृत्व करना चाहिए। मैं 1980 में मुंबई में भाजपा के पहले सम्मेलन में प्रख्यात विधि बता और नेहरू कैबिनेट में मंत्री रह चुके मोहम्मद अली करीम भाई चावला ने भी अपने भाषण में कहा था कि एक न एक दिन वाजपेई भारत के प्रधानमंत्रीअवश्य बनेंगे।
जब सिखों को बचाने के लिए आए थे आगे।
सिख विरोधी दंगों के दौरान जब राजधानी दिल्ली में अपराध कपड़ा मची थी, उसे समय बाजपेई और आडवाणी ने तत्कालीन गृह मंत्री नरसिंह राव से मुलाकात कर सी तैनात करने का सुझाव दिया लेकिन जब अटल जी को अपने सुझाव पर कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली तो हुए पार्टी दफ्तर पहुंचे और स्थानीय नेताओं मदनलाल खुराना और विजय कुमार मल्होत्रा को निर्देश दिए कि वह सीखो और उनकी संपत्ति की सुरक्षा के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं से मोर्चे पर तैनात करें।
अटल बिहारी वाजपेई के प्रमुख सम्मान।
1915 में भारत रत्न की उपाधि से सम्मानित किए गए।
1994 में लोकमान्य तिलक सम्मान से सम्मानित किए गए।
1994 में सर्वश्रेष्ठ सांसद का सम्मान मिला।
1992 में पद्म विभूषण से सम्मानित किए गए।
अटल बिहारी वाजपेई की मृत्यु।
अपने भाषण से मंत्र मुक्त कर देने वाले अटल बिहारी वाजपेई का निधन 16 अगस्त 2018 को हुई थी।
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