डॉ हरगोविंद खुराना की जीवनी/Dr. Hargovind Khurana biography in Hindi.

प्रोटीन संश्लेषण में न्यूकिलाइड की भूमिका का प्रदर्शन करने वाले पहले भारतीय हरगोविंद खुराना थे। हरगोविंद खुराना एक महान वैज्ञानिक  थे जिन्होंने इंग्लैंड के लिवरपूल विश्वविद्यालय में जाकर डॉक्टर ऑफ़ फिलॉसफी की डिग्री हासिल की थी। आज मैं ऐसे महान वैज्ञानिक के बारे में कुछ संक्षिप्त बातें बताने वाला हूं जिसे जानने के बाद आपको उनकी पूरी जानकारी प्राप्त हो सकती है।

डॉ हरगोविंद खुराना की जीवन परिचय।
हरगोविंद खुराना का जन्म 9 जनवरी 1922 को रायपुर पंजाब में हुआ था जो अब पाकिस्तान में पड़ता है। हरगोविंद खुराना के पिता अंग्रेजों के शासनकाल में पटवारी का काम किया करते थे। हरगोविंद अपने चार भाइयों में सबसे छोटे थे। वह पढ़ने में काफी प्रतिभावान विद्यार्थी थे। उनकी शुरुआती पढ़ाई गांव के ही स्कूलों से हुई थी। सन 1945 में एमएससी की परीक्षाओं में उत्तीर्ण हुए तथा भारत सरकार से छात्रवृत्ति प्रकार इंग्लैंड चले गए। इंग्लैंड के लिवरपूल विश्वविद्यालय में प्रोफेसर ए रॉबर्टसन के अधीन अनुसंधान कर उन्होंने डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। इन्हें फिर भारत सरकार से शोध वृद्धि मिली और यह दूरी के के फेडरल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी में प्रोफेसर वी पे लोग के साथ खोजबीन में प्रबृत हुए।
इस वैज्ञानिक युग में सभी इस तथ्य से परिचित है कि संस्करण अथवा मेल मिलाप के जरिए पशुओं की नस्ल और अनाजों की किस्म सुधारी जाती है। यह सुधार किन नियमों के अनुसार और क्यों होता है इसके बारे में सही जानकारी हमें वर्तमान साड़ी में ही मिली है। विश्व के जिन अनेक वैज्ञानिकों ने जीवन की इस पहेली को सुलझाने में योगदान दिया है उसमें से एक है महान वैज्ञानिक डॉक्टर हरगोविंद खुराना।
 बताया कि सभी प्रकार के जीवों का निर्माण कुछ खास रासायनिक तत्वों के मेल से ही होता है। सभी जीवों के लिए हाइड्रोजन नाइट्रोजन कार्बन आदि तत्वों की जरूरत होती है। इन तत्वों के सैकड़ो हजारों परमाणुओं के मेल से जीवन के अनु बनते हैं। हिंदी नो से जीवन की इकाइयों का निर्माण होता है। जैव रसायन में ऐसे ही जैव अनुआ का अध्ययन होता है। इसलिए इस विषय को आणविक जैविक की भी कहते हैं। वस्तुतः एक छोटी सी खास चीज माता-पिता की विशेषताओं को संतान में उतार देती है। यह चीज कोशिकाओं के भीतर होती है। इन सारी बातों की जानकारी डॉक्टर हरगोविंद खुराना ने दी है।

डॉ हरगोविंद खुराना के नोबेल पुरस्कार।
1968 में गार्डनर फाउंडेशन इंटरनेशनल अवार्ड, लोइस फाउंडेशन इंटरनेशनल अवार्ड, बेसिक मेडिकल रिसर्च के लिए अल्बर्ट लश्कर पुरस्कार, पद्म विभूषण पुरस्कार।
डॉ हरगोविंद खुराना की नागरिकता।
डॉ हरगोविंद खुराना की नागरिकता भारत और पाकिस्तान तथा संयुक्त राज्य अमेरिका की थी। यानी इन्हें तीन देशों का नागरिकता प्राप्त था।
हरगोविंद खुराना की मृत्यु।
9 नवंबर 2011 में 89 वर्ष के उम्र में उनकी मृत्यु अमेरिका में हुई।
हरगोविंद खुराना को 1968 में शरीर और चिकित्सा विज्ञान का नोबेल पुरस्कार मिला।
हरगोविंद खुराना न्यूकिलाइड भूमिका का प्रदर्शन करने वाले पहले भारतीय थे।
हरगोविंद खुराना ने किस चीज की खोज की थी।
हरगोविंद खुराना मॉलेक्युलर बायोलॉजी के क्षेत्र में प्रोटीन संश्लेषण में न्यूकिलाइड की भूमिका का प्रदर्शन करने वाले वैज्ञानिक थे।


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